Friday, July 23, 2010

चलो........कुछ समय बस माँ बनकर जियें


माँ शब्द की गहराई को अल्फ़ाज़ों में बांधना किसी के लिए भी आसान नहीं है शायद यही वजह है कि मेरे पास भी माँ से जुड़ी कोई भावुक कविता नहीं है। बस एक अपील है उन सब बहनों के लिए जो माँ हैं या माँ बनने जा रहीं हैं प्लीज़..... कुछ समय के लिए बस माँ बनिये सिर्फ माँ ! अपने बच्चों को पूरा समय दीजिये उनके साथ खेलिए............गाइये...... गुनगुनाइए...... बरसात कि बूंदों में भीगिए...... सुबह जब वो आँख खोले उसके सामने रहिये और रात को उसे अपने सीने में छुपाकर इस बात का अहसास करवाइए कि आप हमेशा उसके पास हैं.......उसके साथ हैं । कभी कभी उसे लेकर यूँ ही टहलने निकल जाइये वो जिधर इशारा करे चलते रहिये । कुछ समय के लिए समय की पाबन्दी को भूलकर बस ! माँ बन जाइये।

हाल ही में एक खबर सुनने में आई कि एक कामकाजी जोड़े की बच्ची ने आया कि देखरेख में अपनी सुनने की ताकत हमेशा के लिए खो दी। कारण यह था कि परेशानी से बचने के लिए आया बच्ची को कमरे में बंद कर टीवी काफी तेज आवाज़ में चला देती थी।

हम आगे बढ रहे हैं , प्रगतिशील हो रहे हैं और ऐसी घटना इसी तरक्की की बानगी भर है। बच्चे को दुनिया में लाने से पहले ही आज के पेरेंट्स हर तरह की प्लानिंग कर लेते हैं पर उसे समय देने के मामले पर विचार कम ही होता है। पिछले कुछ सालों में वर्किंग मदर्स की संख्या में जितना इज़ाफा हुआ है मासूम बच्चों की मुश्किलें भी उतनी बढ़ी हैं। क्रेच और बेबी सीटर जैसे शब्द आम हो गए हैं। अगर संयुक्त परिवार है तो दादी-नानी बच्चों की माँ बन रही हैं (आजकल ऐसे परिवार बस गिनती के हैं ) नहीं तो इन नौनिहालों की परवरिश पूरी तरह नौकरों के भरोसे है। बड़े शहरों में ज्यादातर कामकाजी जोड़ों के बच्चे पूरे दिन अकेले आया के साथ गुजार रहे हैं। सोचने की बात यह है की जो बच्चा आपकी गैर-मौजूदगी में उसके साथ होने वाले दुर्व्यवहार के बारे में बोलकर बताने के लायक भी नहीं है उसे यों अकेला छोड़ना कहाँ तक उचित है ? मेरे विचारों को जानकर कृपया यह न सोचें कि मैं कामकाजी महिलाओं को उलाहना दे रही हूँ या उनकी परिस्थिति नहीं समझती । मैं उनके जज़्बे को सलाम करती हूँ जिसके दम पर वे घर और दफ्तर की ज़िन्दगी में तालमेल बनाकर चलती हैं। पर मैं मानती हूँ की माँ होने की जिम्मेदारी से बढ़कर कोई काम नहीं हो सकता। माँ बनना और अपने बच्चे के विकास को हर लम्हा जीना एक विरल अनुभूति है। जिसे महसूस करना हर माँ का हक़ भी है और जिम्मेदारी भी। कई अध्ययन यह साबित कर चुके हैं कि बच्चे का मनोविज्ञान जैसा उसकी माँ के साथ होता है किसी और के साथ नहीं होता.....दादी-नानी के साथ भी नहीं। ऐसे में एक अजनबी (आया) के साथ बचपन बीतना बच्चों के किये कितना तकलीफदेह हो सकता है यह समझना मुश्किल नहीं है। हम लाख दलीलें देकर भी इस बात को नहीं झुठला सकते कि माँ का विकल्प मनी या आया नहीं हो सकता, कभी भी नहीं। माँ बच्चे के जीवन की धुरी होती है । उसकी हर छोटी बड़ी समझाइश बच्चे के जीवन की दिशा बदल सकती है । लेकिन मौजूदा दौर में तो मांओं के पास वक़्त ही नहीं है तो फिर समझाइश कैसी ? ज़ाहिर सी बात है कि नौकरों के सहारे पलने वाले बच्चों की परवरिश में प्यार और संस्कार की कमी तो है ही मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना भी कुछ कम नहीं है। बचपन के इन हालातों का असर बच्चे की पूरी ज़िन्दगी पर पड़ता है और आगे चलकर हमारे इन्हीं बच्चों का व्यव्हार समाज की दिशा व दशा तय करता है। आज हमारे समाज में औरतों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार और भेदभाव से तकरीबन हर महिला को शिकायत है। ऐसे में माँ होने के नाते आप एक जिम्मेदारी उठायें । अपने बच्चे की परवरिश की , वो बच्चा जो इस समाज का भावी नागरिक होगा शुरू से ही उसे सही सीख देकर एक सुनागरिक बनायें। बेटी को हौसले से जीने का पाठ पढ़ायें और बेटे को घर हो या बाहर औरतों की इज्ज़त करना सिखाएं। ज़ाहिर सी बात है की ऐसी परवरिश के लिए उनके साथ समय बिताना, उन्हें समझना और समझाना बहुत ज़रूरी है। तो फिर मातृत्व को जीने और बच्चों के पालन-पोषण को सही मायने देने के लिए चलो........कुछ समय के लिए बस माँ बनकर जीयें ।


12 comments:

Udan Tashtari said...

सही सलाह!

Mrs. Asha Joglekar said...

बहुत सही पोस्ट और सही समय पर भी । बहुत पहले पढी हुई मालती जोशी की कहानी याद आ गई ।जिसमे उन्होने अनुरोध किया है कि अगर करीअर करना है तो करो फिर विवाह ना करो और वह भी कर लो तो मां मत बनो ।

राज भाटिय़ा said...

बिलकुल सही कहा आप ने अगर बच्चो को सम्भाल नही सकते तो कृप्या बच्चा ना करे, इस से आप पाप से बच जायेगी/ जायेगे...

संजय भास्कर said...

बिलकुल सही कहा आप ने

प्रवीण पाण्डेय said...

अभी संस्तुति कर देता हूँ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत बढ़िया सलाह ! बच्चे तो गीली मिटटी कि तरह होते हैं, जिस सांचे में ढालोगे वैसे ही बनेंगे ...

Vijay Pratap Singh Rajput said...

बहुत अच्छा लिखा है आपने।
यह पोस्ट बहुत अच्छी लगी...

*************************
माँ के दिल में रहो एक याद बनकर ,
बाप के लब पर खिलो मुस्कान बनकर ,
कभी माँ - बाप को अपने से जुदा न करना ,
माँ - बाप आपके साथ चल्लेंगे आसमान बनकर

यूँ दुर्र रहकर दूरियों को बढाया नहीं करते ,
अपने माँ - बाप को सताया नहीं करते ,
हर वक़्त बस जिसे तुम्हारा ख्याल हो ,
उसे अपनी हरकतों से तडपाया नहीं करते

JHAROKHA said...

aadarniy sir
bahut hi preranadayak aur sashakt aalekh ke liye hardik badhai.
poonam

'उदय' said...

... भावपूर्ण अभिव्यक्ति !!!

डॉ.राधिका उमडे़कर बुधकर said...

क्या कहूँ आपकी पोस्ट के बारे में बस आँखे छलक पड़ी ,सच कहूँ आजकल सिर्फ माँ बनकर जीना भी बहुत कठिन होता हैं इतना कुछ करना होता हैं न आज की नारियों को घर बाहर सब संभालना ...............लेकिन मातृत्व से ज्यादा बड़ा सुख मैं भी कोई नही मानती ,अभी कुछ दिनों पहले ही ऐसी ही एक घटना मेरे परिचित के साथ हुई माँ और पापा के साथ न होने से बच्चा अचानक बीमार पड़ने लगा .उस दिन एक ही प्रार्थना दिल से अनचाहे ही निकली " हे भगवान !मुझे ऐसी सफलता न दे जिसका ऋण मेरी बेटी को चुकाना पड़े" .यही सब सोच कर मैं भी दिन रात अपनी बेटी के साथ हूँ .
बहुत शुक्रियां इस पोस्ट के लिए

prerna said...

Bahut hi acha laga ye post...aur jisme Maa sabd hai,usme pyar,prerna sab kuch leept ho hi jata hai..Per mai sath mai ye bhi khna chahungi ki agr maa apne pariwar ko age badhane ke liye,apni pehchan banane ke liye ghr se bahr nikalti hai...to kyn na Pita bhi Maa ki tarh jii le kuch chann..jab dono ne socha ek ghr,ghr mai khlta bachpan...to kyn na MaaPaa ban pura kare wh ye Swapann..Aur ek bat ye bhi btana chahungi ki aj ke pragtiwad yug mai bache bhi bade hokar apni maa ki wh Kurbaniyan bhul jate hai..aur unhe wh ghr mai rakhi matra ek AAya si hi lagti hai...Jisne kuch nhi kiya..jiski koi pehchan nhi..
To ham kya kare ye soch badle jo shayad ab badal nhi sakti...to kyn na..Pati patni mil ke MaaPaa hi ban jae....Kya Maa shabd esi mai uncha darja nhi pa leta ki usne 9mahine ek ansh ko pala..aur maut sa dard pake ek bache ko duniya mai laae...Ye samye mil ke chalne ka hai..naki Purso ko aur badhawa dene ka....

सतीश सक्सेना said...

आप यकीनन अच्छी माँ है...
शुभकामनायें !