Tuesday, September 14, 2010

मातृभाषा, मातृभूमि व माँ का कोई विकल्प नहीं...

6 comments:

गजेन्द्र सिंह said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

भाषा का सवाल सत्ता के साथ बदलता है.अंग्रेज़ी के साथ सत्ता की मौजूदगी हमेशा से रही है. उसे सुनाई ही अंग्रेज़ी पड़ती है और सत्ता चलाने के लिए उसे ज़रुरत भी अंग्रेज़ी की ही पड़ती है,
हिंदी दिवस की शुभ कामनाएं

एक बार इसे जरुर पढ़े, आपको पसंद आएगा :-
(प्यारी सीता, मैं यहाँ खुश हूँ, आशा है तू भी ठीक होगी .....)
http://thodamuskurakardekho.blogspot.com/2010/09/blog-post_14.html

dhiru singh {धीरू सिंह} said...

और हम लोग इन्ही की बेकद्री कर रहे है .

राज भाटिय़ा said...

आज ना कोई मातृभाषा की इज्जत करता है ओर ना ही मातृभूमि तो ऎसा आदमी माँ की इज्जत भी क्या करेगा, इन्हे चाहिये पैसा जिस के लिये यह इन तीनो को भी बेच दे.
आप से सहमत है जी

डॉ. मोनिका शर्मा said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति ....

प्रवीण पाण्डेय said...

सच है।

शरद कोकास said...

सहमत