Thursday, September 25, 2008

माँ

कैसी होती है माँ ?

धरती सी सहनशील
सागर सी गुरु-ह्रदय
सूरज सी कार्यरत
बादल सी करुणामय
ईश्वर सी प्रेममयी
साक्षात माया ममता
ऐसी होती है माँ ।

ममता की मृदु छाया
संतानों पे धरती
जीवन की तपिश से
भरसक रक्षा करती
खुद भूखे रहती पर
सब को खाना देती
तन,मन,धन, सारा
न्योछावर कर देती
ऐसी होती है माँ ।

माँ का सम्मान करें
आदर अभिमान धरें
आहत वो हो जाये
ना ऐसी बात करें
थकी हारी देह को
थोडा विश्राम भी दें
हँसी उसे आजाये
कुछ ऐसी बात करें
कितनी है प्यारी माँ
जग से है न्यारी माँ

ashaj45.blogspot.com

10 comments:

Shastri said...

आशा जी, बहुत ही सरल शब्दों में आप ने बहुत भावनात्मक तरीके से मां के बारे में एक वस्तुनिष्ठ रचना पाठकों के समक्ष रखी है. इसके लिये आभार!!



-- शास्त्री जे सी फिलिप

-- बूंद बूंद से घट भरे. आज आपकी एक छोटी सी टिप्पणी, एक छोटा सा प्रोत्साहन, कल हिन्दीजगत को एक बडा सागर बना सकता है. आईये, आज कम से कम दस चिट्ठों पर टिप्पणी देकर उनको प्रोत्साहित करें!!

सतीश सक्सेना said...

आशा जी !
आपने बहुत अच्छा गीत लिखा , माँ वंदना को मैं देव वंदना से ऊपर मानता हूँ , आज आवश्यकता है कि एएसी ही रचनाएं सामने आयें जिससे convent educated नयी पीढी को कुछ समझ आए ! खेद है कि कुछ लोग आज माँ को भी बहस का विषय बनाना चाहते हैं ! शुभकामनायें !

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत अच्छी कविता ..माँ का रूप सार्थक हो उठा

*KHUSHI* said...

Maa ke har ek pahelu ko acchi tarah likha hai apane... bahut hi sundar rachna hai aap ki

BrijmohanShrivastava said...

अब ये ब्लॉग किसका है पता नही /चलो इसी के मध्यम से शास्त्री जी को प्रणाम कर निवेदन करदूं की उन्होंने वर्ड वेरिफिकेशन हटाने की ऐसी तरकीब बतलाई जैसे बच्चे का हाथ पकड़ कर छोटा अ सिखाते है =उनके आदेश का पालन कर उनका ब्लॉग खोला तो बहुत भावुक माँ के वावत की कुछ ऐसी बात करो जो उन्हें हंसी आजाये ={हम बुजुर्गों को और क्या चाहिए } पर कमेन्ट करना चाहा तो सबसे पहले शास्त्री जी ही दिखे जो कह रहे थे आशा जी आपने बहुत अच्छा लिखा है = अब उलझन की शास्त्री का लिखा कहाँ पढूं

दिनेशराय द्विवेदी said...

सुन्दर गीत। आप को बधाई।

Paliakara said...

कविता सुंदर एवं भावपूर्णा लगी. आभार.

PD said...

दिल तक उतर जाने वाली कविता है यह..
बहुत बढिया..

Keshav Dayal said...

sahaj driday ki swaamini Aasha ji...aapaka yogdaan sarahniya hai. Aapaki yah rachana parhakar meri aankhon mein aansoo chhalachhalaa aaye. Jahhan tak mera prashna hai main apane liye likhataa hoon. Prayaas karroonga ki bahut aage tak aap sab kaa saath doon. Mere vichaaron ko aap http://shrikrishna4.RediffiLand.com par jaan sakati hain. Dhanyawwad.

Keshav Dayal said...

sahaj driday ke swaami Shastri ji...aapaka yogdaan sarahniya hai. Aapaki yah rachana parhakar meri aankhon mein aansoo chhalachhalaa aaye. Jahhan tak mera prashna hai main apane liye likhataa hoon. Prayaas karroonga ki bahut aage tak aap sab kaa saath doon. Mere vichaaron ko aap http://shrikrishna4.RediffiLand.com pay jaan sakate hain. Dhanyawwad.